गौरा के गणपति लाल पधारो पूजा में।
Author: Pushpanjali
मेरी बगीया में आए हनुमान, आओ सखी दर्शन करें
वो किशन मुरार है, जो चुराके खाता माखन हरबार है,
हुआ ब्रिज मंडल में शोर ,चलो सब ब्रज मंडल की ओर, जन्म लियो कान्हा ने
मुरली बजाते हुए सपनों में आते हो
दादी जी का लाड़ मिल के सारा करस्या,
ढोल बजा के नाचो आया है नंदलाला।
गोकुल में बजत है बधैया,
नन्द के घर जन्मे कन्हैया
सिया राम जी की जय प्यारे रघुवर की जय।
मेरे हृदय में बस गए राम सिया राम।
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