बाबोसा थारी चिड़कली उड़ जावेली एक दिन कदी।
Author: Pushpanjali
हल्दी लगाओ आज सखी री शुभ दिन आयो है।
मारो सांवलियो बीरो जी भात मारो भरने आयो है।
सासु केह्वे बिननी रे,तूं एकली बैठी रोए
सुवटीयो जी म्हारो सुवटीयो
बाजे छे नोपत बाजा,
म्हारा रुनिचे रा राजा।।
पितरों का ध्यान लगाओ जी,
पितरों को मान बढ़ाओ जी,
ओ म्हारे घर में है, पितरांजी को वास,पूरो है विश्वास, पितर जी म्हारा करेगा भली
जय हो जय हो तुम्हारी पितर देवता,
जिस घर में वास हो पितरों का,
उस घर की बात निराली है,
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