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Author: Pushpanjali
आजा रे आजा रे,
मिथिला का कण-कण खिला जमाई राजा राम मिला,
रात सपने में घर आई रे भवानी,
माई नी माई मंदिर में अपने, मुझको बुला एक बार।
बुढ़ापो आये गयो।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे, नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
तेरी ममता मई रूप की मां एक मूरत सजाई है।
थारी चुनरी रे पल्ला पर लगवाई दूं गोटा कोर
अपने जगराते पे मैया जी तुसी आप पधारो जी।
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