नाथ में थारो जी थारो
Author: Pushpanjali
बांध लेओ साफो कस लेओ घोड़ों
मैंने झोली फैला दी कन्हैया अब खजाना तूं, प्यार का लुटा दे।
सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया
थारी चुनर लाल लाल जिसमें सांचों गोटो माल
प्रेम के भावों से कन्हैया तोल देंगे हम
आज अयोध्या की गलियों में नाचे जोगी मतवाला
मैं तो कहूंगी बजा के ढोल गिरधर मेरा है
पहचान सके तो पहचान कण-कण में छिपा है भगवान
मंगल कलश सजावां, चंदन चौक पुरावां ।आओ आओ जी गजानन म्हारे आंगणे।
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