जब फागण मेला आए मन मेरा हरसाए।
Author: Pushpanjali
वृंदावन आया कौन सखी यह तो बताओ।
मैं तो गली गली गली गली रोई, मेरे श्याम को मना लो कोई
अठारह डब्बे लग गए श्री खाटू वाली रेल में,
मेरे श्याम तेरा मुस्काना सब घायल करे जमाना,
सारे भक्तों का चला खाटू रेला, लो आया देखो फागण का मेला।
भोले की चढ़ी है बारात, चले सब संग संग में
आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,
नागनिया बनके डस गयी मोहन तेरी बंसुरिया
बरसाने की होली हम देखने जाएंगे।
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