रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम। बैठे पवन सुत प्रभु के चरण में। राम भजन करे सुबह शाम। एक और सिया एक और लखन। बीच में है जग के पालन। अमर है यह दोनों,सिया राम राम राम, जय जय राम।सिया राम राम राम, जय जय राम।
राम की धुन मेरे मन में गूंजे, गूंज रही सुबह शाम।राम की धुन मेरे मन में गूंजे, गूंज रही सुबह शाम।सिया राम राम राम, जय जय राम।सिया राम राम राम, जय जय राम।
तुम हो अवध के राजा, राम नाम लेते हो। जैसे गिरे कोई, उसे थाम लेते हो। हुआ तेरे नाम से मेरा काम, मेरे राम रमैया। किया तु काम हुआ मेरा नाम, मेरे राम रमैया। मेरे जीवन की नईया तेरे नाम।सिया राम राम राम, जय जय राम।सिया राम राम राम, जय जय राम।
हरि मन हरि धन सिया ही भाये। सिया के संग में राम सुहाए। सिया चरण पूजे लाल सुमन से। राम नाम ले मन ही मन से। राम राम जय राम जय जय राम। श्री राम जय राम जय जय राम।राम राम जय राम जय जय राम। श्री राम जय राम जय जय राम।राम राम जय राम जय जय राम। श्री राम जय राम जय जय राम। राम राम मेरे राम।सिया राम राम राम, जय जय राम।सिया राम राम राम, जय जय राम।सिया राम राम राम, जय जय राम।राम राम जय राम जय जय राम। श्री राम जय राम जय जय राम।राम राम जय राम जय जय राम। श्री राम जय राम जय जय राम।