दर दर मेरा सर ये झुके ना, सोच के दर तेरे आता हू।तेरे जैसा मलिक पाकर दुनिया में इतरता हू।
स्वाभिमान से जीने वालो को तेरी राह दिखता हू
मैं हू तेरा नौकर तेरी हज़ारी रोज लगता हू।
मिलती है तनख़्वाह जो तुझसे मैं परिवार चलता हू।तेरे जैसा मलिक पाकर दुनिया में इतरता हू।
क्या देते हो क्या लेते हो, कितनी मेरी मज़दूरी है
सबके आगे भेद क्यू खोलू , ऐसी क्या मज़बूरी है।मिलता है औकात से ज़्यादा , दुनिया को बतलता हू।मैं हू तेरा नौकर , तेरी हज़ारी रोज लगता हू।तेरे जैसा मलिक पाकर दुनिया में इतरता हू।
मिलती है तनख़्वाह जो तुझसे, मैं परिवार चलता हू।मैं हू तेरा नौकर, तेरी हज़ारी रोज लगता हू।
मुझसे लायक मुझेसे काबिल, सेवा को है तरस रहे।मुझ नालयक में क्या देखा, सोच के नैना बरस रहे।सावारिये की सेवा , बच्चो को सिखलता हू।मैं हू तेरा नौकेर, तेरी हज़ारी रोज लगता हू।
मैं ना जानू तूही जाने , कितना मेरा जीवन है
अच्छी लगी हो सेवा मेरी , फिर से समर्पित तन मन है।अगले जनम में फिर सेवा की मैं उम्मीद लगता हू।मैं हू तेरा नौकर तेरी हज़ारी रोज लगता हू।
अज्ञानी हू अंजाने में, कितने पाप किए होंगे
बिसराया भूलो को मेरी, पाप ना तूने गिने होंगे।
कहता रोमी भजन भाव से, तुजको रोज रिझाता हू।मैं हू तेरा नौकर तेरी हज़ारी रोज लगता हू।
दर दर मेरा सर ये झुके ना, सोच के दर तेरे आता हू।तेरे जैसा मलिक पाकर दुनिया में इतरता हू।