तर्ज, ये दिल तो पागल है
ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से न सोने दे,
लवों पे कब, जा करके बैठी, मन चाही न होने दे,
ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से ना सोने दे।
उनके अधरों, पे लवों को, हम भी रख के देखें,
जिस रस को है, चखती बंसी, हम भी चख के देखें,
प्रेम की अमृत, वर्षा में, तन मन को ना भिगोने दे,
ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से ना सोने दे।
श्याम हमारा, दिलबर है कुछ, हक हमारा होगा,
हसरतें है, दिल की दिल में, कैसे गुज़ारा होगा,
कभी कहा ना, बहती गंगा में, हाथ हमे भी धोने दे,
ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से ना सोने दे।
पथरीला पथ है, टेढ़ी राहें, दूर बड़ा बरसाना,
सपना लेकर, आते हैं सब, ख़ाली पड़ता जाना,
कमल सिंह ना, रोके हमे, अब जी भरके रोने दे,
ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से ना सोने दे।
ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से न सोने दे,
लवों पे कब, जा करके बैठी, मन चाही न होने दे,
ये बंसी वैरन है, दो घड़ी चैन से ना सोने दे।