तर्ज़ चालो ए सखियां चालां, हिमांचळ कै द्वारे
राज
कारो – कारो कृष्ण कन्हैया,
राधा रानी गौरी राज ।
शरमा शरमी नैण नचावै,
दोन्यू चोरा – चोरी राज ।।
नैण खोल कर देख मिजाजी,
कैसी मधुरी जोड़ी राज ।
युगल चरण की शोभा निरख्यां,
कूदै पोरी – पोरी राज ।।
सूरत सलोणी जी मेरै मन भाय गई,
बैं युगल छवि की याद, नैण मं छाय गई,
लाग्यो-लाग्यो जी प्रीत को सेल,
समझ बळ खाय गई,
कोई ऊंडी जाण-पिछाण,
जीव तरसाय गई,
माखन की मटकी अणगिणती,
बालपणै मं फोड़ी राज ।
नौ लख गाय नन्दबाबा कै,
तैं चोरी नहीं छोड़ी राज ।।
श्यामबहादुर जी क, रसिया मान गयो,
थारी मीठी-मीठी जी निरख मुस्कान गयो,
हँस कर लेवै फांस,
रीत थारी जाण गयो,
‘शिव’ नैण निजारो मार,
काळजो छाण गयो,
छलियो सुन्दर श्याम बिहारी,
श्री राधा जी भोरी राज ।
रस्तै बगती गुज़रियां की,
नाजुक बाँह मरोरी राज ।।
कारो – कारो कृष्ण कन्हैया,
राधा रानी गौरी राज ।
शरमा शरमी नैण नचावै,
दोन्यू चोरा – चोरी राज ।।