देख, छवि साँवरी सी,
मैं तो, हुई बाँवरी सी,
मेरे मन को, व्ही भा गया,
मोहे, सांवरा पसंद आ गया।
यमुना तट पे, बंसी वट पे,
दिखने लगा वोह, हर पनघट पे,
वोह मेरे, आगे पीछे डोले,
मोहे, गोपी गोपी बोले
मीठी बंसी, सुना वोह गया,
मोहे, सांवरा पसंद आ गया।
मुरली मनोहर, नटवर सुंदर,
मन को चुरा ले एक नज़र पर
मेरे नैनो में समाए,
मेरी नींदों में भी आए
मेरे रोमों में रमता गया
मोहे सांवरा पसंद आ गया।
देखा जो रूप तेरा, कमली सी हो गई,
कमली सी हो गई, पगली सी हो गई,
ओ तेरा, नखसख शृंगार,
तेरे, नैनों में प्यार
मेरे, ह्रदय में बस्ता गया,
मोहे, सांवरा पसंद आ गया।
देख, छवि साँवरी सी,
मैं तो, हुई बाँवरी सी,
मेरे, मन को व्ही भा गया,
मोहे, सांवरा पसंद आ गया।