बाजे मिरदंग और खड़ताल मां कालका चाली आवे से।चाली आवे से,मां कालका चाली आवे से।बाजे मिरदंग और खड़ताल मां कालका चाली आवे से।
काला रूप काले केस बिखरा कर मां काली जब चाली। कदम बढ़ाए अंबर कांपे, धरती धक धक हाले। हुई अंधेरी रात में चाली पूनम आवे से।
बाजे मिरदंग और खड़ताल मां कालका चाली आवे से।चाली आवे से,मां कालका चाली आवे से।बाजे मिरदंग और खड़ताल मां कालका चाली आवे से।
मोटे मोटे नैन क्रोध में हाथ में तेज कटारी। गले मुंडो की माला पहने दुष्टों पर पड़ गई भारी। गूंजे गगन में मां काली किलकार मचावे से।
बाजे मिरदंग और खड़ताल मां कालका चाली आवे से।चाली आवे से,मां कालका चाली आवे से।बाजे मिरदंग और खड़ताल मां कालका चाली आवे से।
कोई कहता इसे कालरात्रि, कोई कहे मरघट वाली। कोई कहता है इसे मात शीतला, कोई कहे देवी काली। दोनों का ही एक रूप मां काली कहावै से।
बाजे मिरदंग और खड़ताल मां कालका चाली आवे से।चाली आवे से,मां कालका चाली आवे से।बाजे मिरदंग और खड़ताल मां कालका चाली आवे से।
अर्ज करें मां भगत सभी तूं उनका साथ निभाईये। जिस राहों में हो तेरे दर्शन वहीं राह दिखाइए। कीर्तन में तेरे ढोलक बाजे झांज बजावे से।
बाजे मिरदंग और खड़ताल मां कालका चाली आवे से।चाली आवे से,मां कालका चाली आवे से।बाजे मिरदंग और खड़ताल मां कालका चाली आवे से।