तर्ज, अरे द्वारपालो
तेरे दर से बढ़कर ए बंसी वाले दुनिया में देखा कोई दर नहीं है। झुक जाता सर जो तेरे आगे मोहन, कहीं और झुकता वह सर फिर नहीं है।
बिना तेरी रहमत बिना तेरी शक्ति, बिना तेरे नजरें इनायत से भगवान हां।बिना तेरे नजरें इनायत से भगवान।🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 भंवर से निकाले कश्ती जो मेरी, मुझको भरोसा किसी पर नहीं है।
तेरे दर से बढ़कर ए बंसी वाले दुनिया में देखा कोई दर नहीं है। झुक जाता सर जो तेरे आगे मोहन, कहीं और झुकता वह सर फिर नहीं है।
कांटो पर पर चलता वह मुस्कुराकर, अमृत समझ कर वह पिता जहर है। हां अमृत समझ कर वह पिता जहर है।🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 तेरा नाम लेने वाला वह भगवान, सीने में रखता कोई डर नहीं है।
तेरे दर से बढ़कर ए बंसी वाले दुनिया में देखा कोई दर नहीं है। झुक जाता सर जो तेरे आगे मोहन, कहीं और झुकता वह सर फिर नहीं है।
आना ही काफी शरण में है तेरी, बिना देखे बिगड़ी बनाता तुम सबकी। हां बिना देखे बिगड़ी बनाता तुम सबकी।🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 किसी के गुनाहों की गिनती कभी भी, करता तू मुरली मनोहर नहीं है।
तेरे दर से बढ़कर ए बंसी वाले दुनिया में देखा कोई दर नहीं है। झुक जाता सर जो तेरे आगे मोहन, कहीं और झुकता वह सर फिर नहीं है।
दौड़ा वह आता है नंगे पांव, भक्तों की सुन के दिल की पुकारे। हां भक्तों की सुन के दिल की पुकारे। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺श्रद्धा से अपनी मजबूर तूने, देखा कभी भी बुलाकर नहीं है।
तेरे दर से बढ़कर ए बंसी वाले दुनिया में देखा कोई दर नहीं है। झुक जाता सर जो तेरे आगे मोहन, कहीं और झुकता वह सर फिर नहीं है।