यशोदा कुबद कनाई करग्यो ये
फाड़ गयो म्हारी चुंदरी उघाड़ी करगयो ये।
श्याम सुंदर तुम्हारी चितवन मधुर ब्रिज गलियों में मुझको नचा ने लगी
बाजे बाजे ढोल नगाड़ा आज,
माजी बाजे मंदिर माय,
हारावाले साड़ी लाज राख ले
माँ मैं तेरा लाडला,
ऊँगली पकड़ के ले आई मुझे,
लुटा दिया भंडार शेरावाली ने, कर दिया मालामाल मेहरवाली ने,
समर चली महाकाली, समर चलीं महाकाली,
मेरी फरियाद सुनले माँ, तेरे दर आया दीवाना,
तुमको रिझाने आया, माँ तुमको मनाने आया,
रहमत कर माँ चरणों में रख ले, जग की मैं ठुकराई हूँ।।
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