गोपाल गोकुल वल्लभे,
प्रिय गोप गोसुत वल्लभं ।
भादी मावस है आई,
भक्ता मिल ज्योत जगाई,
जय बोलो जय बोलो जय हनुमान की,
जय जगजननी माँ,
भवानी मैय्या शारदा हो माँ,
आओ माँ भवानी आओ,
आज मोरे अंगना पधारो,
मैया मैं तेरी पतंग,
हवा विच उडदी जावांगी,
श्याम सलोनो प्यारो म्हारो, मैं लुल लुल जावा
राम दशरथ के घर जन्मे,
घराना हो तो ऐसा हो,
लाल ध्वजा लहराये रे,
मैया तोरी ऊंची पहड़िया ॥
हरियालो महीनों,
नाँचे यो मन मोर,
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