नहीं जानते हम तुमको मनाना,
हमसे कन्हैया रूठ ना जाना,
ज्योत पै मां खेल के नैं आणा पड़ेगा,
लिख देना लिख देना गजानन भाग्य हमारा भी,
कृष्ण कन्हैया छोड़ो मेरी बईया,
हो गई है अब शाम अब घर जाने दो….
बरसाने चली जाऊंगी राधा रानी को मनाऊंगी,
तुलसी की बगिया हरियाली मेरे श्याम जी को प्यारी,
मेरी भक्ति मे रंग बरसाओ,
आओ आओ गजानन आओ….
मेरो छोटो सो मदन गोपाल मचल गयो माखन पर,
गौरा जी का लाला गणपति प्यारा,
कीर्तन की है रात गणेश घर आ जाना
वादा करो मनमोहन लौट के कब आओगे,
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