सांवली तेरी सूरत को मोहन,
देख मीरा दीवानी हुई है,
मंदिर में आओ मोहन,
दर्शन को भीड़ है,
तू टेढो तेरी टेढ़ी रे नज़रिया ।
जिनका दिल मोहन की,
चौखट का दीवाना हो गया,
चलो मनवा वो मोहन जहाँ मिले,
लगा ले मुझे गले,
मेरे मोहन तुम्हे अपनों को,
तड़पाने की आदत है,
मोहन से दिल क्यूँ लगाया है,
यह मैं जानू या वो जाने।
आ जाओ अब तो मोहन,
ओ मेरे श्याम प्यारे,
मन मोहन प्यारा रे,
आओ नी मीरा बाई का देस,
बैठे चार, करें विचार,
ऐसी चर्चा चली,
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