हे गणपति गिरिजानंदन हम ध्याये तुमको आज
राधा करुणा की धार प्रभु प्रेम नदिया,
खाटू का श्याम निराला भक्ता ने लागे प्यारा,
मईया शेरावाली करती सबकी रखवाली,
आ जाओ आ जाओ मईया जी दरबार….
तेरी तस्वीर क्या देख ली सांवरे,
मेरा दिल लूट गया मेरी जां लुट गई,
मईया कबसे इंतजार है भक्तो को तुम्हारा,
मैया नगरकोट वाली,
खोल दे भवन के पट खोल दे,
ईक दुनी दो ते दो दुनी चार,
बालाजी का मंदिर ऊपर सोने की छतरी,
गणपति गणेश नूं उमापति महेश नूं, मेरा प्रणाम है जी मेरा प्रणाम है…
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