नवरात्रों की आई है बहार चलो रे मां के द्वारे चलो
अमवा की डाली लाई बगिया से तोड़के,
मेरो मदन गोपाल धन दौलत मुझे कुछ ना चाहिए, जोडू दोनों हाथ
तूं छोड़कर ऊंचे पर्वत मां आ जा मेरे अंगना मे
कात्यायनी देवी के दर्शन रोग शोक संताप हरे
ना मन हूँ ना बुद्धि ना चित्त अहंकार,
गोरा मैया सजावे पलना गजानंद झूले ललना।
बन नाचे नटनी को आली नंद को किशोर
लंका में डंका बजाए दिया जी अंजनी के ललनवा।
बोलते चलो , बोलते चलो
शेरावाली के जैकारे बोलते चलो ,
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