मैया खोल भवन के द्वार
दर्शन करने संगत आयी
भटक्या से राम मिले कोनी, गुरु बिना ज्ञान मिले कोनी।
दर दर भटकता फिरा, ठोकर बड़ी खाया हूं
बिहारी तेरी यारी पे
बलिहारी रे बलिहारी
लटक मटक चली आई रे भवानी,
लांगुरिया मेरे बर्थ डे पे मुझे क्या तुम गिफ्ट दिलाओगे
बस गए बस गए बस गए राम, मेरे मन बस गए सीता राम।
घर चल अंबे मां मैं घर ले जाऊंगा।
मेरी बहना केशों पर लिख कल्याणी,
मैंने मैया जी के नाम पैगाम लिख दिया।
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