मेरे निताई चाँद, दीन जनों के प्यारे।
अईयां काई ऊबा जी बालाजी हरिया नीम के नीचे।
देशनोक में बैठी मांवड़ी वो करणी, उदियापुर में बैठी मांवड़ी वह करणी
भूतनाथ के द्वार पे जो भी,
अपना शीष झुका देता है,
मेरे बालाजी दी याद जदो आवे।के सालासर वो आईदा।
कैलाश पर्वत पर चढ़ गयो रे,
आज भोला फूलों से सज गयो रे
बांके बिहारी मेरा तुम ही हो भजन।
शिव शंकर ने डमरू बजाया, काशी में आनंद छाया।
राघव जी को कोहबर बिहारी, ढीठाई माफ कीजे हमारी।
महावीर बजरंगी सदा रहो मेरे संगी, भरी सभा में होवे तेरी जय जय जय।
You must be logged in to post a comment.