जयकारो गूंजे रे हो लखदातार को।
भोले सावन महीने में मैं गंगाजल लेकर आई हूं
सावन में ले भोले का नाम,बनेगे तेरे काम,
अपनी तो जैसे तैसे भांग धतूरा खा के
तेरे तो ऊंचे ऊंचे महल, गोरा में रहूं कुटिया में।
गोरा बोली भोले ते ओ भोले।
फस गया है पाप के पंज्ञा में। भोला बह गया गंगा में।
भोले की नगरी चाला रे सासु हो ले नी तयार।
या गोरा मारे बोल कोई रे मेरी दही ले लो।
भोले तेरा घर आंगन भंगिया से महकता है,
You must be logged in to post a comment.