आयो सावन को महीना सखी डालो री झूला।
चलो जी चलो जी, चलो वृंदावन,
बांके बिहारी के करेंगे दर्शन,
आज सोमवार है महादेव का वार है
ओ भोले तू तले उतर के देख, या दुनिया कितनी दुरंगी से।
झिरझिर बुनिया हो झिरझिर बुनिया
मनवा भोले भोले बोल भोले के बिन मुक्ति ना ही मिले।
श्याम धणी आने में,जो देर लगाओगे
बेल पत्तों में ऐसा क्या गुण है भोला हुआ दीवाना।
मने चरणों की दासी बना ले ओ बाबा डमरू वाले।
चाल तने थोडो घुमाई लयाऊँ।
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