बांके बिहारी मस्ती तेरी छाई रे।
क्यूँ हो गई चौखट से दूरी, कुछ तो जरा विचार लो।
जो बहूओ के गुण गाती है, वह सासु मौज उडाती है
थाम लो मैं बिखर जाऊंगा, मैं बिखर के किधर जाऊंगा।।
ठुमक-ठुमक हाले बाबा रे घोडलियो,झांझर री झंकार पड़े।
मैं सेवक तू मालिक श्याम हमारा है।
हर सांसे अब तो करती है तेरा ही शुक्रिया
कर दे कृपा हम भी आए खाटू नई सफारी में।
सज गया मेरा संवारा राधे की हवेली में
दो पंख दिए होते तो उड़ आता खाटूधाम
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