मन मंदिर में साजे बिहारी, मनमोहन तेरी छवि अति प्यारी
गोविंद तेरी गलियों में आकर, गलियां घर की मैं भूल गया हूं।
तू कान्हा मैं तेरी राधिका,
राधा वल्लभ जी के हाथ जड़ाऊ झुनझुना।
बधैया बाजे आँगने में,
जन्मे हैं कृष्ण कन्हैया
गोकुल में बाजे बधईया हो
श्याम के दर पर जो आ जाए, खाली नहीं वह जाता।
तेरी कब से राह निहारूं मेरे यार सांवरे। तेरा पल पल नाम पुकारू मेरे यार सांवरे।
मेरी लड़ गई नजर बिहारी से, क्या लेना दुनियादारी से।
मैं तो हुआ दीवाना मेरे खाटू वाले का।
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