गजानन आए गयो, मेरे मेरे अँगने में
ऊंचे पर्वत पर जन्मे गणेश ललना।
राधे तेरे चरणों की धूल में जो समा जाऊं।
बाल गणेशा पिता महेशा, घर मेरे अइयो रे कि रंग बरसैयो रे।
आज सखी ऐसे मनाईओ गजानंद को।
काहे मचलो है आदि गणेश मनावे माता पार्वती।
गौरी नंदन कृपा बरसाए रखना,
शंकर जी के लाला लम्बी सूंड़ वाला।
जन्म राधा रानी दा सुन के में बरसाने आई आ।
अरे गणपति तेरा नाम सुबह शाम लिया है।
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