राम जी, राम जी,दरश दिखाओ राम जी
ओ मेरे लिले के असवार।
हे गिरधारी कृष्ण मुरारी,नैया करदो पार,
खिवैया बन जावो
घर आ गए लक्ष्मण राम, अवध आनंद भयो।
सखी हे देखूं ना दोनो भैया सांवर गोर।
भाव के भूखे हैं भगवान,
दुखों से जो ठोकर खाई ना होती,
केवट ने कहा रघुराई से,उतराई ना लूंगा हे भगवन
तुझसे प्रीत लगी है राधे,तू ही मन में बसी है
अयोध्या के भाग आज जाग गये हैं, राम आए हैं
You must be logged in to post a comment.