ओड़ो कोड़ो छ रावलो ये राई चन्दन को रोख।
ऊँचो , चवरो , चोकुंटो , जल जमना रो नीर मंगायो जी।
चम्पा री डाली , हिन्डो माण्डयो , रेशम री गज डोर
गौर गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती
गौर ए गणगौर माता खोल ए किवाड़ी
चमकण घाघरो चमकण चीर , बोल बाई रोवां कुण थारा बीर।
चलो जी चलो चलो वृद्धावन,
बांके बिहारी के करेगे दर्शन,
कहते है हक़ से
अधिकार हमारा है,
पलट सुदामा देखन लागे, कित गई मोरी टपरिया रे,
सेवक को अपने सांवरे,
यूँ ना सताइये,
You must be logged in to post a comment.