जी म्हारी चंद्र गौरजा रतनारा खंभा दिखे दूर से।
खिपोली म्हारी खापा छाई तारा छाई रात
महारा बाबाजी के माण्डी गणगौर, दादसरा जी के माण्ड्यो रंगरो झूमकड़ो,
बिजनों कोठे को वासी, बिजनो रंग राच्यो रे मरूवा।
जुग जित्या ये भेन्न बधावना।जाए बांघूंगी ब्रह्मदास जी री कोटडया,
वो देखो एक आया जोगी अपना अलख जगाने
रणुबाई रणुबाई रथ सिनगारियो तो
को तो दादाजी हम गोरा घर जांवा।
ईसरदास बीरा लीलड़ी पलांण क टिक्की ल्यादो जड़ाव की जी।
म्हारी गोर तीसाई ओ राज घाट्यारी मुकट करो।
उदियापुर आई गनगोर। आए उतरी ब्रह्मादासजी री पोल।
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