किया बड़ा मुरली वाले ने।
नैया लगा दी पार मुरली वाले ने,
श्याम धणी संग,
जबसे प्रीत लगाई है,
नैन मिले बात बनी बात बनी प्रेम बड़ा, मैं प्रेम में तेरे खो गया
चिट्ठी प्रेम वाली पाके, मोहना याद करनी हा,
राम रस पीले रे पिलावें मेरे गुरु ज्ञानी,
मची है धूम काशी में ना जाने किस का उत्सव है।
सर पे मोर मुकुट है साजे,
और घुंघराले बाल,
सांवरे क्या कहना,
साँवरे साँवरे साँवरे,
तू छिपा है कहाँ,
तुझको ढूढ़े यहाँ,
चिट्ठी आती है ना तार आता है
फिर खाटू दर्शन को संसार जाता है।
मेरी चिट्ठी आई है उस खाटू के दरबार से,
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