मेरी मैया मेरे घर आई,
मैं तो झूम झूम बांटू बधाई,
ऊँचे ऊँचे पर्वत पे मैया का बसेरा है
जय हो जय हो तेरी जय हो खाटू वाले तेरी जय हो,
छोड़ क्यों बेसहारा रे तूने हमको कन्हैया रे,मुरली वाले बंसी वाले,
कौशल्या, दशरथ के नंदन
राम ललाट पे शोभित चन्दन
एक दिन बोले प्रभु रामचंद्र,
मैं मन की बात बताता हूँ,
गांजों तोड़ रही म्हारी पार्वती माल्यां की बाड़ी में।
मन्ने मोरवी का नंदन बड़ा प्यारा लागे।
इतनी किरपा सांवरे बनाये रखना,
बनड़ो सो लागे रे,
सज धज के म्हारो साँवरो,
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