श्याम धणी आ जाना, मोरछड़ी लहराना,
कौन सुनेगा रे मेरी तुम बिन कान्हा कौन सुने
लाज शर्म हम छोड़ चुके हैं, तुम से नाता जोड़ चुके हैं।
फागुन का महीना आया है,फागुन का महीना आया है,
तूं मेरो कहनों मान लली,भोला संग भांवर मत डाले।
दरबार श्याम तेरा देख,
मैं तो तेरी हो गई,
श्याम जब से मिला है दरबार मैं तो तेरी हो गई।
सुनो खाटू वालो श्याम से कह दो भक्त तुम्हारा दर पे खड़ा है।
दातार हो तो,दया तुम दिखा दो,
गुजारु ये जीवन कैसे,
इतना सीखा दो,
राधाजी के पायल के घुंघरू नृत्य करते बिखर गये,
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