रानीसति चालीसा,
उलटी गंगा ना बहे झुके न आसमान
मेरी मैया कभी न भूले भैया करना भगत का काम
इमें भाव भरा है दादी थे करलो माँ सवीकार
चूनड़ ल्याया हां भवानी जी थारा सेवक आज रे
मंगसीर की नवमी आई, खुशियाँ ही खुशियाँ छाई,
चालो जी सगला मिलके दादी ने सजावा,
माँ रानी सती सुन ले तेरो लाल बुलावे है,
आजा रे नंदलाल सांवरा बरसाना में आजा रे।
शिव के सहारे चलती दुनियां सारा ब्रह्मांड बोले।
शिव के चरणों में करके बसेरा,लगा जीवन में खुशियों का ढेरा।
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