दूध दही घी ले जल झारी रे। मावस ने म्हारा श्याम धणी, मल मल कर नहावे रे।
तुम कालों के काल, बाबा मेरे महाकाल
शिव भोलो परणवा हालीया, हर बोलो लाल जियो।
पट खोल मेरे बाबा ओ डमरू वाले
रंग बाँको साँवरिया डार गयो री,
डार गयो री,
आई शिवजी की बरतिया हिमाचल नगरी।
दूल्हा बन के चले है भोले बाबा,
देखो जी शिव रात आ गई,
चली शंकर की बरतिया हिमाचल नगरी
जटा विच गंगा रहन्दी ए, गौरजा पूछती रहन्दी ए,
पार लगाओ भोले नाथ मेरी तो सागर में पड़ी नैया।
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