श्रृंगार कन्हैया का, बड़ा प्यारा लगता है,
यहाँ वहा सारे जहाँ में तेरा राज है,
टूट गया जग से भरोसा,
खुद से ही मैं हारा श्याम,
गिरधर तेरे चरणों में हर सांस गुजर जाए
अब के बरस ओ सांवरिया,
म्हारे मन की करजे रे,
सारे जग से निराला मेरा तो खाटू वाला,
सब कुछ भूल कर, कुंवर साँवरे,
रखा तेरे दर, ये सर साँवरे,
मेरा कोई नहीं श्याम तेरे सिवा,
तेरे दरपे सवाली आया हु,
नगरी हो वृन्दावन सी, गोकुल सा घराना हो।
भटके हुए को बाबा, तू राह दिखाएं।
You must be logged in to post a comment.