ये मेरे सिर पे हाथ धरा, फूल मुरझाया मेरा खिला ,
Category: श्याम भजन लिरिक्स
मैंने अर्जी लिखदी बाबा तेरे दरबार में
मुझे जो भी कुछ मिला है,
तुमने ही सब दिया है,
जिस दिन सिर मैं अपना,
कहीं और झुकाऊं,
बन गई बन गई जोगनिया,
मैं तो अपने श्याम की,
रंगीला मौसम छाई बहार,
था सब को जिस पल का इंतज़ार,
म्हें भी आवाँगा,
म्हाने बुलाल्यो थे सरकार
टाबरिया बैठा है,
जो देणो है सो बाँट दे।।
ऐ मेरे श्याम तेरा प्रेमी जग से हारा है।
ग्यारस की रात फिर आयी रे,
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