थे तो हो माजीसा म्हारा घना रे रूपाला
Author: Pushpanjali
लडुआ सा गोल मटोल हमारी गौरा का लाला।
आज है आनंद बाबा नन्द के भवन में, ऐसा ना आनंद छाया कभी त्रिभुवन में।
सज धज कर चले त्रिपुरारी, वृंदावन की सुहानी गली में।
मैया पहले मैं मनाऊं तेरे गणपति को।
अब तो तेरा सहारा है मैया, दिल ने तुझको पुकारा है मैया।
मैं तो सिवरू वो देव गणेश सरस्वती वो थाने सिवरु,
तेरे जन्मों की भटकन मिटेगी,
तू राधे राधे बोल जरा,
गाओ हिल मिल सभी बधाई, बाज उठी मंगल शहनाई।
मेरे गणपति जी महाराज हमारे घर आ जाना।
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