आयो फागण को त्योहार, झाला देवे लखदातार,
Author: Pushpanjali
नखरा छोड़ दे सांवरिया मोसे प्रेम बढ़ा ले रे। नखरा छोड़ दे
तेरे दर को में छोड कहा जाओ माँ,
दूजा कोई द्वार न दिखे,
मैं छोड़कर दर तेरा कहीं और न जाऊंगा।
भरदे झोली भर दे भरदे झोली श्याम।
मैंने ओढ़ ली श्याम के नाम की चुनर सतरंगिया।
फागुन को आग्यो आग्यो जी त्यौहार,
चलो चला आपा खाटू धाम,
सबकी सुनते हैं श्याम खाटू वाले, मन की बातें तुम देखो सुना के
खाटू श्याम तेरे जैसा कोई दूजा ना भगवान है।
दिन और दुखियों ने जब भी पुकारा है। खाटू वाला श्याम बना उनका सहारा है।
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