मोहन तेरी प्रीत ये कैसी, जाकी रही भावना जैसी। प्रभु मूरत देखी बिन तैसी,
जन्म जन्म की पूंजी पाई जग में सभी खुवायो। खरचे न कोई चोर ना लेवे, दिन-दिन बढत सवायो। पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।
हृदय प्रेम के कुंजन में , बाती प्रेम की बन जाते हो। मेरे रोम रोम में ओ कान्हा, तुम ऐसे बस जाते हो। जितना तुम्हारा भजन किया उतना ही पास में पायो। तुम्हरे चरणों की रज में मोरा जग संसार समायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।
भवसागर में डूबी है जीवन की यह डगरिया। प्रेम में अपने बांध लो मुझको माधव कृष्ण कन्हैया। नाम तेरा रटते रटते हो गई मैं तो जोगनिया। दरस को प्यासी यह अखियां बहती जैसे नदिया।बहती जैसे नदिया।
कान्हा कान्हा रटते रटते मैं कान्हा की हो जाऊं। मुरली की धुन सुनते-सुनते भाग तेरे पीछे चली आऊं। रंग रसिया है सांवरा, वह छलिया है बावरा। जब दर्शन तुमरा करू ,मन भाव से मेरा भर आयो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरस हरस यस गायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे।हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे।हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे।हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे।