मेरे श्याम तुमसे है, विनती हमारी, गुनाहों की करना ना, गिनती हमारी, मेरे श्याम तुमसे हैं ।
गलती के पुतले,गुनहगार है हम, आदत से अपनी,लाचार है हम।मगर है दया की तो, आदत तुम्हारी।गुनाहों की करना ना, गिनती हमारी।
मेरे श्याम तुमसे हैं,विनती हमारी।गुनाहों की करना ना,गिनती हमारी। मेरे श्याम तुमसे हैं ।
कमजोर हूँ मैं, मुझे ना परखना।
गलतियां भुलाकर के, चरणों में रखना।
कितनो की तुमने है,खताएं बिसारी।
गुनाहों की करना ना,गिनती हमारी।
मेरे श्याम तुमसे हैं,विनती हमारी।
गुनाहों की करना ना,गिनती हमारी।
मेरे श्याम तुमसे हैं।
तुम तक रहे मेरे, गुनाहों का परचा। ज़माने से करना ना, कभी इसकी चर्चा। बातें बनाएगी, दुनिया ये सारी। गुनाहों की करना ना,गिनती हमारी।मेरे श्याम तुमसे हैं,विनती हमारी,
गुनाहों की करना ना, गिनती हमारी।
मेरे श्याम तुमसे हैं।
अवगुण मिटाना,काम है तुम्हारा,
इसीलिए पतित पावन,नाम है तुम्हारा,
सोनू’ का तुम पर है,विश्वास भारी,
गुनाहों की करना ना,गिनती हमारी।मेरे श्याम तुमसे है, विनती हमारी, गुनाहों की करना ना, गिनती हमारी, मेरे श्याम तुमसे हैं ।
मेरे श्याम तुमसे है, विनती हमारी, गुनाहों की करना ना, गिनती हमारी, मेरे श्याम तुमसे हैं ।