में तो श्याम की दीवानी होई रे,
मैं तो सांवरे के रंग में खोई रे।
तू मेरौ मै तेरी सांवरिया,
मन में बस गई तेरी सुरतिया
मै तो श्याम रंग चुनर भिगोई रे।।में तो श्याम की दीवानी होई रे,
मैं तो सांवरे के रंग में खोई रे।
हरि के कारण बन गई जोगन,
लाइलाज भई ऐसी में रोगन
मेरी रातों की निंदिया भी खोई रे ।।में तो श्याम की दीवानी होई रे,
मैं तो सांवरे के रंग में खोई रे।
बेदर्दी तौये तरस ना आवे,
श्याम पिया तेरी याद सतावै
कहां प्रीत की रीत निभाई रे ।।में तो श्याम की दीवानी होई रे,
मैं तो सांवरे के रंग में खोई रे।
हिय मटके सांवरिया नन्द नंदन,
ढूंढो गली गली बृज वृन्दावन
सारी गोकुल ढूंढ मचाई रे।। में तो श्याम की दीवानी होई रे,
मैं तो सांवरे के रंग में खोई रे।